काशीपुर। 3अगस्त 2024 बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का उत्तराखंड सरकार का दावा खोखला नजर आ रहा है सरकारी अस्पताल में कुत्ते के काटने पर लगाए जाने वाले रेबीज के इंजेक्शन न होने के कारण क्षेत्रीय और स्थानीय लोग परेशान और बेहाल हैं।अस्पताल से बिना इंजेक्शन लगवाए ही मरीज निराश होकर लौट रहे हैं।और प्रशासन मौन है। बता दे की सरकारी अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन नहीं है।

जिसके चलते छोटे बच्चों को या बड़ों को कुत्ता काट लेता है तो वह सीधे तौर पर सरकारी अस्पताल का रुख करता है। परंतु सरकारी अस्पताल में पर्चा बनवाने के बाद जब वह डॉक्टर के पास रेबीज के इंजेक्शन के लिए पहुंचता है तो मरीज को जानकारी मिलती है कि अस्पताल में रेबीज का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है जिससे मरीज निराश होकर अपने पास से ही बाहर मेडिकल स्टोर से रेबीज का इंजेक्शन माल खरीद कर अपने या अपने बच्चों के लगवाता है। जहां उत्तराखंड सरकार बेहतर चिकित्सा सुविधा उत्तराखंड के निवासियों को देने का दावा कर रही है वहीं अस्पताल में दवाइयां न मिलने से अस्पताल सरकार के दावों की पोल खोल रहा है। ताजा मामला सामने आया है जहां बहुजन समाज पार्टी के महानगर अध्यक्ष डॉक्टर एम ए राहुल तो कुछ लोगों ने फोन करके अस्पताल बुलाया और उनसे कहा कि उनके बच्चों को कुत्ते ने काट लिया है और अस्पताल के डॉक्टर उनके बच्चों के इंजेक्शन नहीं लग रहे। डॉक्टर एम ए राहुल ने बताया कि जाकिर और फिरोज के बच्चो को,तथा बंटी व रमेश,को कुत्ते ने काट लिया था वह अस्पताल इंजेक्शन लगवाने आए थे परंतु जब उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई तो उनके द्वारा फोन पर सूचना दी की उनके बच्चों को कुत्ते ने काट लिया है सरकारी अस्पताल पहुंचे हैं इंजेक्शन लगवाने डॉक्टर इंजेक्शन नहीं लग रहे हैं। सुचना पर मिलने के बाद अस्पताल पहुंचे और चिकित्सा अधिकारी से उनके द्वारा बातचीत की गई बातचीत करने पर चिकित्सा अधिकारी के द्वारा बताया गया कि अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है उनके द्वारा जिला अधिकारी को पत्र भेज कर अवगत कराया गया है परंतु अभी तक अस्पताल को रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन ना मिलने पर गरीब निराश होकर घर वापस लौट गए। अब सवाल उठता है कि ऐसे में जब उनके रेबीज का इंजेक्शन नहीं लगा। अस्पताल में केवल टेक्निक्स का इंजेक्शन लगाकर ही कौन है घर भेज दिया गया। अगर इन लोगों को कुत्ते के रैबीज से कोई खतरा हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा सरकार होगी या अस्पताल प्रशासन किया जिला प्रशासन कुछ कहा नहीं जा सकता फिलहाल उत्तराखंड सरकार का बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का दवा खोखला नजर आ रहा है।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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