जसपुर।2 मई 2025 जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर नल लगाए जाने की योजना धराशाई होती दिखाई दे रही है ठेकेदार और उत्तराखंड पेय जल निगम के अधिकारी और कर्मचारी जल जीवन मिशन योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा कर व्यारे न्यारे कर उत्तराखंड सरकार को करोड़ों रुपयों का चूना लगा रहे हैं। खुद चांदी काट रहे हैं। बता दें कि इससे पूर्व भी हमारे द्वारा 2 दिसंबर 2024 को समाचार प्रकाशित किया गया था।


ग्राम पंचायत भरतपुर में 4 करोड़ 80 लाख 42 हजार रुपए से लगाई गई पानी की टंकी ग्रामीणों के लिए हवा हवाई साबित हो रही है। क्योंकि ग्राम पंचायत में ट्यूबवेल बोरिंग करने में 82 लख रुपए की लागत आई है। ट्यूबवेल डेढ़ वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी गंदा पानी ही नालों में आ रहा है।अब ऐसे में सवाल खड़े होने लाजिम है ग्रामीणों का आरोप है कि शुरू से शिकायत करने के बावजूद भी जल विभाग के अधिकारियों के द्वारा ठेकेदार को ट्यूबवेल का पानी चेक नहीं किया। और ठेकेदार का 82 लाख रुपए का भुगतान उत्तराखंड पेयजल निगम हल्द्वानी के द्वारा ठेकेदार को दे दिए गए हैं। उत्तराखंड में जल जीवन मिशन के अंतर्गत वर्ष 2022 में उत्तराखंड प्रदेश की हर एक ग्राम पंचायत में पानी की टंकी तथा ट्यूबवेल एवं ग्रामीण सड़कों में पाइप की लाइन डालने के टेंडर आमंत्रित किए गए थे। राज्य सरकार और केंद्र सरकार का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में निवास कर रहे ग्रामीणों को घर-घर स्वच्छ जल पहुंचने के सपने पर पेय जल निगम के अधिकारी ही पलीता लगाते नजर आ रहे हैं।

कागजी कार्यवाही में काम पूरा किया गया परंतु धरातल पर कार्य अभी भी अधूरा ही पड़ा है गांव में कई सड़के ऐसी हैं जिसमें अभी भी पाइपलाइन नहीं पड़ी है तो कहीं सड़क अभी भी खुदी हुई पड़ी है जिन पर आरसीसी होनी थी और अधूरी पड़ी है।खुदी हुई सड़कों पर ठेकेदार के द्वारा आर बीएम तक नहीं डाला गया है और पेयजल निगम अधिकारियों के द्वारा ठेकेदारों का भुगतान कर दिया गया है। ग्राम पंचायत का कार्य पूरा हुए एक साल 6 माह का समय बीत जाने के बाद भी बोरिंग में पानी गंदा ही आ रहा है ग्रामीण पानी के लिए परेशान और बेहाल हैं। बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी उत्तराखंड पेयजल निगम के द्वारा कोई समाधान नहीं किया गया है।

परंतु इतना धन खर्च करने के बाद भी ग्रामीण शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं। सबसे मजे की बात इसमें यह है कि कार्य पूरा भी नहीं हुआ है उत्तराखंड पेयजल निगम हल्द्वानी के द्वारा ठेकेदारो की धनराशियों का भुगतान भी कर दिया गया है। जमीनी स्तर पर कार्य पूरा हुआ हो या नहीं हुआ हो परंतु कागजी कार्यवाही में कार्य पूरा ही हो चुका है ठेकेदार के द्वारा ट्यूबवेल पेय जल निगम हल्द्वानी के अधिकारियों के सपुर्द कर दिये गए हैं। मौजूदा अधिकारियों ने ग्राम पंचायत के ट्यूबवेल का पानी चेक किए बिना ही ठेकेदारो को ट्यूबवेल करने का लगभग 82 लाख रुपए का पेमेंट का पूरा भुगतान कर दिया। जबकि ग्रामीण उसी समय से अधिकारियों से शिकायतें कर रहे हैं की पानी पीने योग्य नहीं है पानी नल में गंदा आ रहा है पानी में रेते की मात्रा ज्यादा है। लगभग डेढ़ वर्ष बाद उत्तराखंड पेयजल निगम के अधिकारियों की नींद अभी खुली नहीं है।

इसके बारे में कोई अधिकारी बोलने के लिए तैयार नहीं है बारहाल सरकार को उत्तराखंड पेयजल निगम हल्द्वानी के अधिकारी जल जीवन मिशन योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहे हैं।ग्राम भरतपुर की स्थिति ऐसी ही बनी हुई है भरतपुर ग्राम पंचायत के बारे में जल निगम के अधिकारियों ने अभी कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई है।भरतपुर ग्राम पंचायत के ग्रामीण परेशान और बेहाल हैं। वारहाल सरकार का करोड़ों रुपया खर्च होने के बाद भी ग्रामीण शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं। और जनप्रतिनिधि इस मामले में मौन साधे हुए हैं। यदि सरकार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच कराई तो कई अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त मिलेंगे और हर घर जल हर घर नल योजना में करोड़ों के घोटाले का खुलासा हो सकेगा।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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