काशीपुर। 20 अप्रैल 2025 फैक्ट्री के तीन सेट पर काम कर रहे मजदूर की 60 फुट की ऊंचाई से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। दुर्घटना की सूचना मिलते ही परिजनों कोहराम मच गया सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करने के बाद सब परिजनों को सौंप दिया है।घटना के संबंध में अभी कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।

नौ माह पूर्व ही हुई थी मृतक शिवम की शादी,डेढ़ माह में हुई परिवार में दो दुर्घटनाएं
बता दें कि
भगतपुर थाना क्षेत्र के गांव सकतपुरा निवासी शिवम कुमार पुत्र समर पाल काशीपुर के गिरधई में स्थित बहल पेपर मिल में मजदूरी का कार्य करता था शुक्रवार 17 अप्रैल 2025 को वह रोज की भांति फैक्ट्री में पुताई का काम करने गया हुआ था कि वह फैक्ट्री के तीन सेट के ऊपर बिना सेफ्टी बेल्ट के ही कार्य कर रहा था शाम को जैसे ही काम खत्म होने का समय आया तो तीन सेड का तख्ता टूट गया और शिवम लगभग पचास फीट की ऊंचाई से नीचे गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गया घायल तुरंत ही हॉस्पिटल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। शिवम की मौत की खबर सुनते ही पत्नी अर्चना व शिवम के माता पिता का रो रो कर बुरा हाल हो गया। मृतक के चचेरे भाई ने आरोप लगाया कि वह मृतक शिवम के साथ ही काम कर रहा था शाम करीब 4:45 की घटना है। उसका भाई शिवम 60 फीट ऊंचाई के टीन सेट के ऊपर पुताई का कार्य कर रहा था। की कुछ लोगों ने बताया कि तुम्हारे साथ का एक व्यक्ति नीचे गिर गया है। उसने बताया कि इतने वह कहां पहुंचा तो उसके भाई को एंबुलेंस से अस्पताल ले गए जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत्यु घोषित कर दिया। उसने बताया कि फैक्टरी प्रशासन यदि उन्हें सेफ्टी बेल्ट उपलब्ध कराता तो उसके भाई की जान नहीं जाती। उसने बताया कि बताया जाता है शिवम की नौ माह पूर्व ही शादी हुई थी। लगभग डेढ़ माह पहले ही शिवम के चाचा की घर के पास ही रोड क्रॉस करते समय दुर्घटना में मौत हो गयी थी। डेढ़ माह में एक ही परिवार में हुई दो मौतों से गांव में हर व्यक्ति की आंख नम थी। उधर फैक्ट्री प्रबंधन ने उन्हें मुआवजा देने का वादा किया है। क्या मुआवजा दिए जाने से एक इंसान की कमी को पूरा किया जा सकता है। फैक्ट्री प्रबंधन कि मामले में घोर लापरवाही सामने आई है फैक्ट्री प्रबंधन के द्वारा मजदूरी कर रहे पेंटर की सेफ्टी बेल्ट बंधी हुई नहीं थी और ना ही सेफ्टी बेल्ट का कोई व्यवस्था थी यदि फैक्ट्री प्रबंधन की तरफ से सेफ्टी बेल्ट बांधे जाने की व्यवस्था होती तो आज शिवम जीवित होता हां इतना जरूर होता कि उसके थोड़ी बहुत चोट लग सकती थी परंतु जान की हानि नहीं होती। फैक्ट्री प्रबंधन के द्वारा मुआवजे की बात की गई है। अधिकतर देखने को मिलता है की फैक्ट्री में होने वाली घटनाओं में प्रशासन फैक्ट्री प्रबंधन का ही साथ देता नजर आता है पीड़ित परिवार को चंद रुपए देकर शांत कर दिया जाता है अब सवाल उठता है क्या एक व्यक्ति का जीवन इतना सस्ता हो गया है 4 से 5 लख रुपए देकर परिवार को शांत कर दिया जाता है। जबकि मृतक की शादी हुए करीब 9 महीने ही हुए हैं और फैक्ट्री प्रबंधन के लापरवाही के कारण शिवम की तो मौत हो ही गई परंतु उसे उसकी पत्नी तथा परिवार को जो पीड़ा हुई है उसका कोई हिसाब किसी के पास नहीं है और ना ही कोई उसका मूल्य चुका सकता है। परंतु ऐसी घटनाओं से परिवार बिखर जाता है प्रशासन को भी इस और ध्यान देना चाहिए और पीड़ित परिवार को फैक्ट्री प्रबंधन की तरफ से इतना मुआवजा तो मिलना ही चाहिए जिससे कि उसकी पत्नी माता-पिता अपने जीवन में कोई कार्य करके परिवार का भरण पोषण कर सकें।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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