रुद्रपुर। 27 मई 2025 दोहरे हत्याकांड में आखिरकार घटना को अंजाम देने वाले व्यक्तियों को न्यायालय ने कठोर कार्यवास की सजा सुनाई है। बता दे की 10 साल 9 माह पूर्व ग्राम दुर्गापुर नवलपुर निवासी हरनाम सिंह उर्फ हन्नी और उसके साथी कुलवंत सिंह उर्फ गोले की हत्या कर दोनों के शव जंगल में कुंडा थाना पुलिस ने बरामद किए थे। उपरोक्त मामले में मृतक हरनाम सिंह के पिता बच्चन सिंह की तहरीर पर थाना कुंडा में अब्दुल रहमान,जसवंत सिंह उर्फ नंदी, जसवंत सिंह उर्फ जस्सा, भगत सिंह उर्फ भगत, प्रकाश सिंह उर्फ पासी, लखवीर सिंह उर्फ वीरी, दारा सिंह, प्रकाश सिंह, चांदी सिंह, लाल सिंह उर्फ बलविंदर सिंह, बलविंदर सिंह उर्फ विंदर,11 व्यक्तियों के खिलाफ नाम दर्ज अभियोग पंजीकृत किया गया था। दोहरे हत्याकांड का खुलासा करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मानव वध सेल के प्रभारी तथा कुंडा थाना पुलिस के सहयोग से पुलिस के द्वारा 10 लोगों को दोहरे हत्याकांड में दोषी मानते हुए आरोपी बनाया गया था। तथा दौरानी विवेचना पुलिस ने अब्दुल रहमान के हत्या में शामिल नहीं होने के कारण पुलिस ने अब्दुल रहमान को थाने से ही छोड़ दिया था। जबकि पुलिस ने दोहरे हत्याकांड में 10 लोगों को न्यायिक विरासत में जेल भेज दिया था।

10 वर्ष 9 माह बाद परिवार को मिला न्याय, 10 व्यक्तियों को आजीवन कारावास की सजा 20500 का जुर्माना
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्या ने 10 साल नौ महीने पहले काशीपुर के कुंडा थाना क्षेत्र में हुए दोहरे हत्याकांड के दस दोषियों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 20 हजार 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। काशीपुर के कुंडा थाने में ग्राम दुर्गापुर नवलपुर निवासी बचन सिंह ने 24 अगस्त 2014 को केस दर्ज कराया था। बचन के अनुसार उनका बेटा हरनाम सिंह उर्फ हनी गांव में कच्ची शराब बेचने वालों का विरोध करता था।

इसके चलते शराब बेचने वाले कश्मीर सिंह उर्फ शीरी, जसवंत सिंह उर्फ नंदी, विंदर सिंह निवासी दुर्गापुर, लखविंदर सिंह उर्फ वीरी निवासी ग्राम किलावली, जस्सा सिंह, मंगल सिंह उर्फ मंगत, बबलू सिंह, पासी सिंह, पप्पी सिंह निवासी ग्राम नवलपुर और दारा सिंह उनके बेटे से दुश्मनी रखते थे। कहा कि 21 अगस्त 2014 की दोपहर आरोपी उनके घर आए थे। हनी के घर पर नहीं मिलने पर आरोपियों ने बेटे को समझा लेने के लिए कहते हुए जान से मारने की धमकी दी। 22 अगस्त की शाम को अब्दुल रहमान निवासी गुज्जर डेरा तुमड़िया डाम ने हनी को बहाने से डेरे पर बुलाया था। आरोपियों ने हमसाज होकर उनके बेटे हरनाम सिंह उर्फ हन्नी और उसके साथी कुलवंत सिंह उर्फ गोले की हत्या कर शव जंगल में फेंक दिए। दो दिन बाद 24 अगस्त को दोनों शव मच्छी कोटा के पास बरामद हुए थे। पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की थी। पुलिस ने ने जांच में कुछ लोगों की लिप्तता मिली थी। मुकदमे की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्या की अदालत में हुई। सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से 18 गवाह और साक्ष्य पेश किए गए। इस पर अदालत ने जसवंत सिंह उर्फ नंदी, जसवंत सिंह उर्फ जस्सा, भगत सिंह उर्फ भगत, प्रकाश सिंह उर्फ पासी, लखवीर सिंह उर्फ वीरी, दारा सिंह, प्रकाश सिंह, चांदी सिंह, लाल सिंह उर्फ बलविंदर सिंह, बलविंदर सिंह उर्फ विंदर को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आखिर दोहरे हत्याकांड में 10 वर्ष 9 माह का इंतजार करने के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।
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