काशीपुर। 8 नवंबर 2025
उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रदेशभर में रजत जयंती उत्सव मनाया गया। इसी क्रम में काशीपुर ब्लॉक सभागार में भी भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, महापौर दीपक वाली, उपजिलाधिकारी अभय सिंह, पुलिस अधीक्षक स्वपन किशोर, क्षेत्राधिकारी दीपक कुमार और तहसीलदार पंकज कुमार द्वारा राज्य आंदोलनकारियों को शॉल ओढ़ाकर और प्रशस्ति पत्र (मेमोento) देकर सम्मानित किया गया।
सम्मान पाने वालों में काशीपुर के कई प्रमुख आंदोलनकारी शामिल रहे —
भारत भूषण (कचनाल गाजी), दीपक वाली (टांडा उज्जैन), शगुन बत्रा (मुखर्जी नगर), संजय आर्य (मोहल्लागंज), संजीव कुमार उर्फ अप्पू (आर.के.पुरम, मानपुर रोड), शोभित शर्मा (काजीबाग), राजेंद्र पाल (कानूनगोयन) और नरपत सिंह राजपूत (मुखर्जी नगर) आदि।
????️ कार्यक्रम में मचा विवाद
कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल गर्मा गया जब राज्य आंदोलनकारी नरपत सिंह राजपूत मंच पर आमंत्रित न किए जाने से नाराज हो उठे। उन्होंने कुर्सी से खड़े होकर कहा —
“यह कार्यक्रम सम्मान का नहीं बल्कि खानापूर्ति का प्रतीक लग रहा है। आज जब उत्तराखंड राज्य की 25वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, तब उन आंदोलनकारियों को मंच पर बुलाने का भी समय नहीं है जिन्होंने इस राज्य के लिए अपनी जवानी, अपनी आज़ादी और कई बार अपनी जान की बाज़ी तक लगा दी। अगर यह सम्मान है, तो फिर अपमान कैसा होता है?”
उनकी नाराजगी को देखते हुए महापौर दीपक वाली ने खुद मंच से उतरकर उन्हें शांत किया और सम्मानपूर्वक मंच पर आमंत्रित किया।
???? मंच से छलका दर्द — “हमारे संघर्ष की आवाज़ अब भी अनसुनी है”
मंच पर पहुंचकर भावुक हुए नरपत सिंह राजपूत ने कहा —
“आज मुझे गहरी पीड़ा है कि जिस राज्य के लिए हमने सड़कों पर संघर्ष किया, लाठियां खाईं, जेल गए, उस राज्य में आज भी हमारी आवाज़ को दबाया जा रहा है। हम उत्तराखंड के लिए लड़े ताकि यहां के नौजवान को रोजगार मिले, माताओं-बहनों को सम्मान मिले, पलायन रुके और पहाड़ का दर्द खत्म हो। लेकिन आज 25 साल बाद भी उत्तराखंड के असली सिपाही, यानी आंदोलनकारी, पहचान और हक के लिए भटक रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा —
“जब हम आंदोलन में निकले थे, तब हमारे पास न सत्ता थी, न संसाधन, लेकिन दिल में जलती थी उत्तराखंड की आग। हमने इस राज्य की नींव अपने खून-पसीने से रखी है। आज वही लोग मंच से बाहर हैं, और जो कभी संघर्ष में दिखे भी नहीं, वे मंच पर भाषण दे रहे हैं। यह दुर्भाग्य है कि जिनके संघर्ष से राज्य बना, उन्हीं को भुला दिया गया।”
उन्होंने बताया कि हाल ही में जब वह एक अधिकारी से मिले और स्वयं को राज्य आंदोलनकारी बताया तो उन्हें तिरस्कारपूर्ण जवाब मिला।
“उस दिन मुझे एहसास हुआ कि सरकार और तंत्र अब राज्य आंदोलनकारियों को बोझ समझने लगा है। जबकि सच यह है कि अगर हमने आंदोलन न किया होता तो आज उत्तराखंड अस्तित्व में ही नहीं होता। सरकार को चाहिए कि हर आंदोलनकारी का सही सत्यापन कर उन्हें वह सुविधाएं दे जो एक सच्चे राज्य आंदोलनकारी को मिलनी चाहिए। यह हमारी नहीं, हमारे संघर्ष की मान्यता की मांग है।”
राजपूत ने कहा कि आज उत्तराखंड की हर विधानसभा, हर शहर, हर विकास योजना के पीछे राज्य आंदोलनकारियों की तपस्या है।
“काशीपुर, बाजपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी — यह सब तब अस्तित्व में आए जब हमने अपनी आवाज़ को बुलंद किया। आज उत्तराखंड अगर विकसित है तो यह उन्हीं आंदोलनकारियों के पसीने की देन है। लेकिन अगर राज्य हमें भूल जाएगा, तो आने वाली पीढ़ियां भी इस संघर्ष की गाथा को भूल जाएंगी।”
???? कार्यक्रम का सांस्कृतिक रंग
इस अवसर पर छात्राओं द्वारा उत्तराखंड की संस्कृति और लोक परंपरा को दर्शाने वाले आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
???? अधिकारियों ने किया नमन
उपजिलाधिकारी अभय सिंह ने कहा —
“हम उन सभी आंदोलनकारियों और शहीदों को नमन करते हैं जिनके संघर्ष से उत्तराखंड का सपना साकार हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जिस औद्योगिक पैकेज से उत्तराखंड को नई पहचान दी, वह राज्य के विकास की नींव साबित हुआ।”
उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड एक विकसित राज्य के रूप में आगे बढ़ रहा है और यह सब आंदोलनकारियों की मेहनत और त्याग की बदौलत संभव हुआ है।
???? काशीपुर से रिपोर्ट — काशी क्रांति न्यूज़ टीम
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