Oplus_16908288
काशीपुर। 9 नवंबर 2025 उत्तराखंड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और राज्य की उन्नति की शुभकामनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम प्रदेश अध्यक्ष श्री करण माहरा के निर्देशानुसार, महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन के नेतृत्व में आयोजित किया गया।

कांग्रेस के मुख्य अतिथि एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश महासचिव अनुपम शर्मा ने संयुक्त रूप से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और 25वीं वर्षगांठ का केक काटकर राज्य स्थापना दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनाया।
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस प्रदेश महासचिव अनुपम शर्मा ने मंच से गरजते हुए कहा—
“उत्तराखंड आंदोलनकारियों ने अपना खून, पसीना और जीवन का अमूल्य समय इस राज्य के निर्माण के लिए लगा दिया। लेकिन आज 25 साल बाद भी सरकार उनका सम्मान करने में नाकाम रही है — यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि अन्याय है!”

उन्होंने सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा:
“जब यह राज्य बन रहा था तब सड़कों पर संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों को आज पहचान भी नहीं दी जा रही है। यह कैसा विकास, यह कैसी संवेदनहीनता? जिनके बलिदान से उत्तराखंड बना, उन्हीं की अनदेखी करना शर्मनाक है!”
अनुपम शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:
“सरकार को चाहिए कि वह वास्तविक आंदोलनकारियों की पहचान की सच्ची जांच करे और जिन्हें उनका हक मिलना चाहिए, तत्काल मिले। आंदोलनकारियों को सिर्फ शॉल, शाबाशी या मंच से सम्मान नहीं चाहिए — उन्हें न्याय चाहिए, अधिकार चाहिए!”
उन्होंने आगे कहा:
“कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई में आंदोलनकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। यह हमारा संकल्प है कि आंदोलन के सच्चे सिपाहियों को उनका सम्मान, पहचान और अधिकार दिलाने के लिए हम सड़कों से लेकर सदन तक संघर्ष करेंगे।”
भावुक होते हुए उन्होंने कहा:
“उत्तराखंड आंदोलन की आत्मा — उसके सिपाही हैं। अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो यह रजत जयंती केवल एक औपचारिक उत्सव बनकर रह जाएगी। हम ऐसा नहीं होने देंगे। उनके त्याग को इतिहास में दर्ज कराना और वर्तमान में सम्मान दिलाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।”
कार्यक्रम में पीसीसी सदस्य श्रीमती अलका पाल ने गहरी संवेदना और दृढ़ संकल्प के साथ कहा—

“उत्तराखंड आंदोलनकारियों ने अपने सपनों, संघर्ष और भविष्य को दांव पर लगाकर इस राज्य को जन्म दिया था। लेकिन आज 25 साल बाद भी उनके अधिकार अधूरे हैं… यह देखकर मन व्यथित हो उठता है।”
उन्होंने भावुक स्वर में सरकार पर सवाल उठाया—
“क्या उन सिपाहियों का यही सम्मान है जिनकी बदौलत उत्तराखंड बना?
वे आज भी पहचान के लिए तरस रहे हैं…
उनके त्याग को कब याद किया जाएगा?”
अलका पाल ने स्पष्ट कहा—
“हम मंच पर फूल चढ़ाकर, भाषण देकर कर्तव्य पूरा नहीं कर सकते।
सच्चा सम्मान तभी होगा जब सच्चे आंदोलनकारियों को उनका हक़ मिलेगा।”
उन्होंने आंदोलनकारियों की पीड़ा को अत्यंत संवेदनशील तरीके से उजागर करते हुए कहा—
“आज भी कई आंदोलनकारी संघर्ष की अग्नि से गुजर रहे हैं।
कुछ बुजुर्ग हो गए… कुछ बीमार…
और कई परिवार आज भी उम्मीद की चिंगारी जलाए बैठे हैं।
सरकार की अनदेखी उनके जख्मों को और गहरा करती है।”
वह आगे बोलीं—
“कांग्रेस पार्टी आंदोलनकारियों के साथ सिर्फ बोलकर नहीं, बल्कि मैदान में खड़े होकर साथ देगी।
हम हर उस दरवाजे पर दस्तक देंगे जहां से न्याय मिल सकता है।
यह लड़ाई सिर्फ सम्मान की नहीं — अधिकार की है।”
अंत में उन्होंने भावनाओं से भरे शब्दों में कहा—
“उत्तराखंड आंदोलन की आत्मा तभी शांति पाएगी जब उसके सिपाही मुस्कान के साथ कह सकेंगे — ‘हां, हमें हमारा हक मिल गया।’
और उस दिन तक…
हम उनके साथ हर कदम पर खड़े रहेंगे।
इस मौके पर प्रदेश पीसीसी सदस्य अलका पाल, प्रदेश सचिव जितेंद्र सरस्वती, प्रदेश सचिव मंसूर अली मंसूरी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरीश कुमार एडवोकेट, विकल्प गुड़िया,महेंद्र बेदी, के अलावा तमाम कांग्रेसी नेता मौजूदरहे।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
कार्यालय – इस्लामनगर बसई, थाना कुंडा, काशीपुर, उधम सिंह नगर, उत्तराखण्ड
संपर्क – 99279 76675
