नई दिल्ली / काशीपुर।
देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की बहुचर्चित ‘वोट चोर–गद्दी छोड़’ महारैली को लेकर पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। इसी क्रम में उत्तराखंड के काशीपुर से कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ बड़ा शक्ति प्रदर्शन करते हुए सैकड़ों कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को गाड़ियों के काफिले के साथ दिल्ली के लिए रवाना किया।
काशीपुर के मुरादाबाद रोड स्थित जसपुर बस अड्डे से सुबह कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। इस काफिले में पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, युवा कार्यकर्ता और अधिवक्ता बड़ी संख्या में शामिल रहे। इस दौरान लगभग 130 गाड़ियों में 700 कार्यकर्ता और पदाधिकारी दिल्ली के लिए रवाना हुए।

दिल्ली रवाना होने से पहले एआईसीसी सदस्य अनुपम शर्मा और कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने केंद्र की भाजपा सरकार पर लोकतंत्र, संविधान और चुनावी व्यवस्था को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देश में वोट चोरी के जरिए सत्ता हथियाने की कोशिशें हो रही हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है।
विधि प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट उमेश जोशी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर यह महारैली आयोजित की जा रही है। उन्होंने बताया कि काशीपुर से करीब 20 गाड़ियों में लगभग 100 अधिवक्ता इस रैली में भाग लेने के लिए दिल्ली रवाना हुए हैं। एडवोकेट उमेश जोशी ने कहा कि यह केवल राजनीतिक रैली नहीं, बल्कि संविधान और न्याय व्यवस्था की रक्षा का आंदोलन है, जिसमें अधिवक्ता समाज मजबूती से कांग्रेस के साथ खड़ा है।

वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव मंसूर अली मंसूरी ने केंद्र सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार की सह पर काम कर रहा है, और चुनावी प्रक्रिया में बड़े स्तर पर बेमानी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के मत का दुरुपयोग किया जा रहा है और लोकतंत्र को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति पर काम हो रहा है।

सचिन मंसूरी ने कहा कि इन्हीं हालातों को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘वोट चोर–गद्दी छोड़’ महारैली का आयोजन किया गया है। इस रैली के माध्यम से जनता को जागरूक करने और सरकार की कथित लोकतंत्र विरोधी मंशा को बेनकाब करने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र को खत्म करने की किसी भी कोशिश को कामयाब नहीं होने देगी।
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि यह महारैली सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश की राजनीति को नई दिशा देने वाला आंदोलन साबित होगी।
???? अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या यह महारैली केंद्र सरकार पर निर्णायक दबाव बना पाएगी?
और क्या 2026–27 की राजनीति की दिशा यहीं से तय होगी?
देश की निगाहें अब दिल्ली पर टिकी हैं, जहां कांग्रेस सत्ता के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुकी है।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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