काशीपुर। 11 जनवरी 2026 केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की संरचना और नाम में किए गए बदलाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इसे गरीबों के अधिकारों पर हमला बताते हुए भाजपा पर धार्मिक प्रतीकों के सहारे राजनीति करने का आरोप लगाया है।
महानगर कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री श्रीमती अलका पाल ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना के साथ छेड़छाड़ कर सरकार गांधी दर्शन की मूल भावना को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में ‘राम’ जैसे पवित्र नाम को जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है।

अलका पाल ने कहा कि महात्मा गांधी रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) किया जाना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह मजदूरों के “काम के अधिकार” को खत्म करने की दिशा में उठाया गया कदम है। नया कानून VB-G RAM G मनरेगा की कानूनी रोजगार गारंटी को कमजोर करता है।
उन्होंने बताया कि पहले इस योजना में 90 प्रतिशत बजट केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती थी, लेकिन अब इसे बदलकर 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य कर दिया गया है। इससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और अंततः इसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ेगा।
महानगर अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा एक मांग आधारित योजना थी, जिसमें काम मांगने पर सरकार को रोजगार देना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था में काम अब केंद्र द्वारा तय बजट और मानकों के अनुसार ही मिलेगा। जैसे ही फंड खत्म होगा, मजदूर का अधिकार भी समाप्त हो जाएगा।
अलका पाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने कानूनी रोजगार गारंटी को एक केंद्र-नियंत्रित योजना में बदल दिया है, जिसमें खर्च राज्य करेंगे और नियंत्रण पूरी तरह केंद्र के हाथ में रहेगा। इससे ग्राम सभाओं और पंचायतों की भूमिका कमजोर होगी, जबकि मनरेगा ने पंचायत स्तर पर लोकतंत्र को मजबूती दी थी।
उन्होंने कहा कि नई योजना में जीआईएस सिस्टम, पीएम गति शक्ति, बायोमेट्रिक, जियो-टैगिंग, डिजिटल डैशबोर्ड और तकनीकी ऑडिट को अनिवार्य किया गया है। इससे वे लाखों ग्रामीण मजदूर योजना से बाहर हो जाएंगे, जो तकनीकी प्रक्रियाओं को समझने में सक्षम नहीं हैं।
अलका पाल ने यह भी कहा कि खेती-किसानी के सीजन में मजदूरों को दो महीने तक रोजगार नहीं मिलेगा, जिससे रोजगार गारंटी कानून की मूल भावना ही समाप्त हो जाती है। ऐसे में मजदूरों को फिर से शोषण और असुरक्षा के हालात में धकेला जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि योजना का नाम बदलने पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे, लेकिन इससे न तो बेरोजगारी कम होगी और न ही महंगाई पर कोई असर पड़ेगा। यह बदलाव मनरेगा की आत्मा पर सीधा हमला है।
अंत में महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस तरह के जनविरोधी फैसलों का पुरजोर विरोध करेगी और करोड़ों गरीब, मजदूरों व कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह प्रतीकात्मक राजनीति छोड़कर आम जनता के हक में ठोस फैसले ले।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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