हल्द्वानी। 11 जनवरी 2026 प्रॉपर्टी विवाद और कथित पुलिसीय अनदेखी ने एक और जिंदगी छीन ली। हल्द्वानी के एक होटल में आत्महत्या करने वाले काशीपुर निवासी युवक के मामले में अब जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
काशीपुर के अलीगंज रोड स्थित ग्राम पैगा निवासी सुखवंत सिंह (40) द्वारा हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र स्थित होटल में आत्महत्या करने के मामले में अब चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। शनिवार देर रात करीब ढाई बजे सुखवंत ने अपनी कनपटी पर गोली चला ली। इस दौरान कमरे में मौजूद उसकी पत्नी परदीप कौर और बेटा गुरसेज सिंह छर्रे लगने से घायल हो गए। मौके पर ही सुखवंत सिंह की मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार घायलों को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजा गया है।
धोखाधड़ी की शिकायत, लेकिन नहीं हुई सुनवाई
परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार सुखवंत सिंह लंबे समय से जमीन से जुड़े एक बड़े धोखाधड़ी मामले से परेशान था। बताया जा रहा है कि उससे करोड़ों रुपये लेकर गलत जमीन का बैनामा कर दिया गया था। इस गंभीर आरोप को लेकर सुखवंत ने स्थानीय पुलिस चौकी से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सुखवंत सिंह ने आत्महत्या करने से पहले क्या कहा देखिए वीडियो
परिवार का आरोप है कि लगातार पुलिस की अनदेखी और न्याय न मिलने की हताशा ने सुखवंत को मानसिक रूप से तोड़ दिया, जिसके बाद उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
क्राइम एंगल: सिस्टम की नाकामी या मजबूरी में उठाया गया कदम?
यह मामला अब केवल आत्महत्या का नहीं रह गया है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी, प्रशासनिक उदासीनता और संभावित लापरवाही का एंगल भी जुड़ गया है। सवाल यह उठता है कि यदि समय रहते पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई होती, तो क्या एक परिवार उजड़ने से बच सकता था?
समाज और प्रशासन के लिए चेतावनी
यह घटना स्पष्ट करती है कि जब पीड़ित न्याय के लिए चौकी से लेकर एसएसपी कार्यालय तक भटकता है और फिर भी उसे राहत नहीं मिलती, तो भरोसा टूटता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन को संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई दिखानी चाहिए, ताकि कोई भी नागरिक खुद को अकेला और असहाय महसूस न करे।
निष्कर्ष
सुखवंत सिंह की मौत सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी माफिया, फर्जी दस्तावेज़ों और सिस्टम की चुप्पी पर बड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में केवल जांच तक सीमित रहती है या उन कारणों तक पहुंचती है, जिन्होंने एक व्यक्ति को मौत का रास्ता चुनने पर मजबूर किया।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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