काशीपुर। 13 जनवरी 2026
काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह की मौत का मामला अब केवल आत्महत्या तक सीमित नहीं रहा। पुलिस महकमे में हुई कार्रवाई के बावजूद विपक्ष ने सरकार की नीयत और कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोतवाली आईटीआई प्रभारी समेत दो पुलिस कर्मियों के निलंबन और पैगा पुलिस चौकी के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर किए जाने को कांग्रेस ने “ऊपरी दिखावटी कार्रवाई” करार दिया है।
कांग्रेस का कहना है कि जब तक मामले के असली दोषियों—जिनमें प्रभावशाली लोग और जिम्मेदार अधिकारी शामिल हैं—पर सीधी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है।

इसी क्रम में बुधवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ग्राम पैगा पहुंचे। दोनों नेताओं ने मृतक किसान के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना जताई और न्याय की लड़ाई में हर स्तर पर साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
पुलिस पर लापरवाही और संरक्षण के आरोप
परिजनों से बातचीत के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक किसान का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुका है।
गणेश गोदियाल ने कहा,
“यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि एक किसान के सम्मान और न्याय की लड़ाई है। कांग्रेस इस परिवार को अकेला नहीं छोड़ेगी। सड़क से लेकर सदन तक सरकार को जवाब देना होगा।”

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पूरे मामले की जड़ पुलिस की लापरवाही और संरक्षण है, तो कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही क्यों सीमित रखी जा रही है।
“जब जिले के शीर्ष पुलिस अधिकारी सवालों के घेरे में हैं, तो मुख्यमंत्री बताएं कि उनके खिलाफ कार्रवाई से परहेज क्यों?”—गोदियाल ने कहा।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का हमला
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस मामले को “इंसाफ बनाम सिस्टम” की लड़ाई बताते हुए कहा कि मृतक किसान द्वारा आत्महत्या से पहले बनाया गया वीडियो सरकार और पुलिस पर सीधा आरोप है।
यशपाल आर्य ने कहा,
“माफिया और कुछ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत ने एक किसान को इस हद तक मजबूर कर दिया कि उसने अपनी जान दे दी। यह राजनीति का नहीं, बल्कि इंसाफ का मामला है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक वीडियो में नामजद अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।
“यह संघर्ष सड़क से शुरू होकर सदन तक जाएगा। सरकार को जवाब देना ही पड़ेगा,” उन्होंने कहा।
सरकार की साख पर सवाल
कुल मिलाकर किसान सुखवंत सिंह की मौत अब सरकार और पुलिस प्रशासन की नैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी का बड़ा सवाल बन चुकी है। विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच अब निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या सरकार असली दोषियों तक पहुंचेगी या यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े सियासी टकराव का रूप लेगा।
काशी क्रांति
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सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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