काशीपुर से विशेष रिपोर्ट
गदरपुर से उठे राजनीतिक विवाद ने अब काशीपुर तक सियासी ताप बढ़ा दिया है। काशीपुर नगर निगम के महापौर दीपक बाली ने एक प्रेस वार्ता कर भाजपा विधायक अरविंद पांडे पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें पार्टी और मुख्यमंत्री नेतृत्व के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। महापौर के बयान ने भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
🔺 “दिग्गज नेता हैं, लेकिन रास्ता गलत” — बाली
प्रेस वार्ता में महापौर दीपक बाली ने कहा कि अरविंद पांडे भाजपा के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं तथा उनके साथ उनके व्यक्तिगत संबंध भी मधुर रहे हैं। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि
“पिछले चार वर्षों से वे प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ साजिश रचने में लगे हैं, जो पार्टी और प्रदेश हित में बिल्कुल ठीक नहीं है।”
बाली ने यह भी कहा कि जिस पार्टी को पांडे “मां” कहकर संबोधित करते हैं, उसी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान देना “विश्वासघात” की श्रेणी में आता है।

🔺 “छोटे मुद्दों को बनाते हैं बड़ा विवाद”
महापौर ने आरोप लगाया कि विधायक पांडे छोटे-छोटे संगठनात्मक और प्रशासनिक मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाकर भाजपा सरकार और संगठन को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।
“यह एक घिनौना षड्यंत्र है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,” बाली ने सख्त लहजे में कहा।
उन्होंने खुद को पार्टी का “एक छोटा कार्यकर्ता” बताते हुए कहा कि वे संगठन की मर्यादा और मुख्यमंत्री नेतृत्व के सम्मान से समझौता नहीं होने देंगे।
🔺 बलराज पासी पर भी अप्रत्यक्ष दबाव
प्रेस वार्ता के दौरान महापौर दीपक बाली ने पूर्व सांसद बलराज पासी का नाम लेते हुए उन्हें भी सीधे तौर पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पासी अरविंद पांडे को पुत्र समान मानते हैं, लेकिन मौजूदा विवाद में उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
महाभारत का उदाहरण देते हुए बाली ने कहा:
“महाभारत में धृतराष्ट्र पुत्र मोह में असहाय थे, लेकिन यहां ऐसा नहीं होना चाहिए। बलराज पासी जी को साफ करना चाहिए कि वे किसके साथ हैं — संगठन के या व्यक्तिगत निष्ठा के।”
इस टिप्पणी को राजनीतिक गलियारों में स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अब तटस्थ रहने की गुंजाइश कम होती जा रही है।
🔺 भाजपा की अंदरूनी राजनीति खुलकर सतह पर
गदरपुर विधायक को लेकर उठे विवाद में पहले ही भाजपा के कई स्थानीय नेता मुखर हो चुके हैं। अब महापौर स्तर से आया यह बयान दर्शाता है कि मामला सिर्फ प्रशासनिक या व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व के प्रति निष्ठा से जुड़ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
- यह बयान भाजपा के भीतर स्पष्ट ध्रुवीकरण का संकेत है
- मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व बनाम क्षेत्रीय शक्ति केंद्रों की खींचतान अब खुलकर सामने आ रही है
- 2027 के चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व अनुशासन को लेकर सख्त संदेश देना चाहता है
🔺 क्या यह चेतावनी है?
महापौर दीपक बाली की प्रेस वार्ता को केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है। संदेश साफ है —
पार्टी लाइन से अलग जाकर सार्वजनिक बयानबाज़ी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निष्कर्ष:
गदरपुर से शुरू हुआ विवाद अब भाजपा की आंतरिक राजनीति का खुला अध्याय बन चुका है। महापौर दीपक बाली के तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में यह मामला और गहराएगा या संगठनात्मक कार्रवाई की दिशा ले सकता है।
2027 की चुनावी तैयारी के बीच भाजपा के लिए यह सिर्फ एक व्यक्ति का विवाद नहीं, बल्कि नेतृत्व, अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता की परीक्षा बनता जा रहा है।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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