काशीपुर। 16 सितंबर 2026 महानगर कांग्रेस कमेटी की जिला अध्यक्ष अलका पाल ने उत्तराखंड सरकार पर सरकारी जमीनों के कथित हेरफेर और कम कीमत पर आवंटन का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन को खुर्द-बुर्द नहीं होने देगी।
अलका पाल ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में इन्वेस्टमेंट मीट के नाम पर सरकारी जमीनों को बाहरी लोगों को कम कीमत पर देने की भूमिका तैयार की गई। उन्होंने देहरादून के सिडकुल से लगे छरबा क्षेत्र की 325 बीघा जमीन का मामला उठाते हुए कहा कि यह जमीन छोटे उद्यमियों को कारोबार शुरू करने के उद्देश्य से अधिगृहीत की गई थी, लेकिन छोटे उद्यमियों को इसका लाभ नहीं मिला।

उन्होंने दावा किया कि पहले इस जमीन को उत्तर प्रदेश के एक शिक्षण संस्थान को देने का प्रयास किया गया, लेकिन बाद में यह जमीन पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी (UPES), बिधौली को आवंटित कर दी गई। अलका पाल के अनुसार, वर्तमान बाजार मूल्य करीब 1.5 करोड़ रुपये प्रति बीघा बताया जा रहा है, जबकि जमीन को 37.65 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से विश्वविद्यालय को दिए जाने का आरोप है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि सरकार को जमीन का आवंटन करना ही था तो इसके लिए पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई। अलका पाल ने कहा कि जमीन उन संस्थानों या उद्यमियों को दी जानी चाहिए थी, जो क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए निवेश करना चाहते थे।
अलका पाल ने यह भी आरोप लगाया कि 325 बीघा जमीन 122.36 करोड़ रुपये में आवंटित किए जाने के करीब तीन महीने बाद सर्किल रेट संशोधित कर दिया गया। उनके मुताबिक नए सर्किल रेट के आधार पर जमीन की कीमत बढ़कर करीब 75.20 लाख रुपये प्रति बीघा हो गई, जिससे कुल मूल्य लगभग 244 करोड़ रुपये बैठता है।
उन्होंने दावा किया कि सर्किल रेट के आधार पर गणना करने पर सरकार को करीब 122 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अलका पाल ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच और जमीन आवंटन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
नोट: उपरोक्त आंकड़े और आरोप अलका पाल द्वारा लगाए गए हैं; सरकारी पक्ष/संबंधित प्राधिकरण की प्रतिक्रिया इस बयान में शामिल नहीं है।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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