काशीपुर। महानगर कांग्रेस कमेटी की जिला अध्यक्ष अलका पाल ने उत्तराखंड सरकार से गन्ना किसानों के हित में समर्थन मूल्य ₹500 प्रति कुंतल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी किसान अपनी उपज का भुगतान पाने के लिए परेशान हैं। एक ओर खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान और बकाया भुगतान ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अलका पाल ने कहा कि वर्ष 2012 से अब तक काशीपुर चीनी मिल पर करीब सात हजार किसानों का 25 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया होने की बात सामने आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में लगभग दस वर्षों से भाजपा की सरकार है, तो किसानों को उनकी मेहनत की कमाई का भुगतान अब तक क्यों नहीं मिल पाया? आखिर कब तक किसान अपने ही हक के पैसे के लिए दर-दर भटकते रहेंगे? उन्होंने सरकार से बकाया भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने और किसानों को जल्द राहत दिलाने की मांग की।कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि बीती 9 अक्टूबर को आए तूफान और ओलावृष्टि से धान, गन्ने सहित कई फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। अनेक किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसके बावजूद प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दे रहा है।उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का पारदर्शी और निष्पक्ष आकलन होना चाहिए, ताकि वास्तविक नुकसान झेलने वाले किसानों को उचित मुआवजा मिल सके। जब किसान की महीनों की मेहनत प्राकृतिक आपदा में बर्बाद हो जाती है, तो उसकी भरपाई की जिम्मेदारी सरकार की बनती है। केवल आश्वासन देने से किसानों की समस्याएं दूर नहीं होंगी, बल्कि इसके लिए समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।अलका पाल ने कहा कि दूसरे राज्यों में गन्ना किसानों को बेहतर मूल्य देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि उत्तराखंड में गन्ने के समर्थन मूल्य को लेकर किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती खाद, बीज, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों की लागत के बीच किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना बेहद जरूरी है।उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि गन्ने का समर्थन मूल्य ₹500 प्रति कुंतल घोषित किया जाए, काशीपुर चीनी मिल पर किसानों का लंबित भुगतान जल्द कराया जाए और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को नुकसान के अनुरूप मुआवजा दिया जाए।अलका पाल ने कहा कि “किसान देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि किसान अपनी फसल का उचित मूल्य पाने और बकाया भुगतान के लिए संघर्ष करने को मजबूर है, तो यह व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़ा करता है। सरकार को किसानों की समस्याओं पर राजनीति करने के बजाय ठोस निर्णय लेकर उन्हें राहत देनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी किसानों के हक और सम्मान की लड़ाई में हमेशा उनके साथ खड़ी रही है और आगे भी खड़ी रहेगी।”उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उचित समर्थन मूल्य, समय पर भुगतान और नुकसान की भरपाई जैसे ठोस कदमों से ही संभव है। अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार किसानों की इन मांगों पर कब तक निर्णय लेती है।
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