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काशीपुर। काशीपुर मीडिया सेंटर द्वारा आयोजित जनहित संवाद कार्यक्रम में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। पत्रकारों ने महिला सुरक्षा, नाबालिग किशोरियों के लापता होने की बढ़ती घटनाओं, तहसील में जाति एवं स्थायी प्रमाण पत्र बनाने में हो रही देरी, रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज में महीनों का समय लगने, खतौनी में नाम दर्ज होने में वर्षों की देरी, तालाबों पर अवैध निर्माण तथा ग्रामीण क्षेत्रों की नहरों पर बढ़ते अतिक्रमण जैसे विषयों पर अधिकारियों से सवाल किए।

एसपी स्वप्न किशोर बोले— बिना निगरानी मोबाइल और अभिभावकों की ढिलाई बन रही चुनौती, बच्चों पर सामूहिक सामाजिक निगरानी की परंपरा भी हुई कमजोर
कार्यक्रम में सबसे अधिक चर्चा नाबालिग किशोरियों के घर से लापता होने के मामलों को लेकर हुई। इस पर पुलिस अधीक्षक स्वप्न किशोर ने विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया और मोबाइल फोन का अनियंत्रित उपयोग परिवारों और पुलिस, दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में माता-पिता यह कहते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी को मोबाइल फोन नहीं दिया, लेकिन जांच के दौरान पता चलता है कि उसके पास मोबाइल था और वह किसी के संपर्क में थी। कई बार घर से जाने के बाद उसका पुराना मोबाइल नंबर बंद कर नया नंबर उपलब्ध करा दिया जाता है, जिससे पुलिस जांच और लोकेशन ट्रेस करने में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करती है।

“पहले समाज भी बच्चों की जिम्मेदारी निभाता था”
एक अन्य सवाल के जवाब में एसपी स्वप्न किशोर ने सामाजिक बदलाव पर चिंता व्यक्त करते हुए अपना बचपन याद किया। उन्होंने कहा कि जब वह छोटे थे, तब उनके माता-पिता ने आसपास के लोगों से साफ कह रखा था कि यदि उनका बेटा कहीं गलत जगह खड़ा मिले, कोई अनुचित काम करता दिखाई दे या गलत संगति में दिखे तो उसे तुरंत डांट दें और इसकी जानकारी परिवार को दें।
उन्होंने कहा कि आज ऐसे अभिभावकों की संख्या बहुत कम रह गई है, जो पड़ोसियों या समाज के लोगों को यह अधिकार देते हों कि यदि उनका बच्चा बीड़ी पीता, सिगरेट पीता, गुटखा खाता या किसी गलत गतिविधि में शामिल दिखाई दे तो उसे टोका जाए या परिवार को इसकी सूचना दी जाए।
एसपी ने कहा कि समय के साथ परिस्थितियां बदल गई हैं। आज कई लोग यह महसूस करते हैं कि यदि वे किसी बच्चे की गलत आदत की शिकायत उसके माता-पिता से करेंगे तो कई बार अभिभावक बच्चे को समझाने के बजाय शिकायत करने वाले व्यक्ति से ही विवाद करने लगते हैं। यही कारण है कि समाज में बच्चों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और सामाजिक निगरानी की भावना पहले की तुलना में कमजोर हुई है।
उन्होंने कहा कि इसका असर यह हो रहा है कि कुछ बच्चे घर से बाहर निकलने के बाद धूम्रपान, नशे या अन्य गलत गतिविधियों की ओर बढ़ रहे हैं। यदि समाज और परिवार दोनों मिलकर बच्चों पर सकारात्मक निगरानी रखें और समय रहते उन्हें सही मार्गदर्शन दें तो ऐसी कई समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
एसपी ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों, मित्र मंडली, सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के उपयोग पर नियमित नजर रखें। नाबालिग बच्चों में सही और गलत का निर्णय लेने की परिपक्वता पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए परिवार की सतर्कता और संवाद बेहद आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुनौतियां चाहे कितनी भी हों, पुलिस पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है तथा अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। किसी भी अपराधी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
जनहित संवाद में प्रमुख मुद्दे
- महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था।
- नाबालिग किशोरियों के लापता होने की घटनाएं।
- तहसील में जाति एवं स्थायी प्रमाण पत्र बनाने में देरी।
- रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज की लंबी प्रक्रिया।
- खतौनी में नाम दर्ज होने में अत्यधिक विलंब।
- तालाबों पर अवैध निर्माण और संरक्षण का मुद्दा।
- लालपुर–हरियावाला–बसई नहर तथा धीमरखेड़ा नहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की नहरों पर अतिक्रमण।
कार्यक्रम में पत्रकारों ने इन सभी जनहित के मुद्दों पर संबंधित विभागों से समयबद्ध कार्रवाई और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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