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नई दिल्ली, 3 अगस्त। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में पूर्व सांसद एवं भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

इसी मामले में नामजद डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी अदालत ने सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह फैसला लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद आया है।
बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद अदालत ने 10 मई 2024 को उनके खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसके बाद गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।
फैसला सुनाए जाने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही स्वयं को निर्दोष बताया था और अदालत के निर्णय से उनका पक्ष सही साबित हुआ है। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई विरोधाभास थे, जिन पर अदालत ने भी गौर किया। उन्होंने कहा कि विस्तृत आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर प्रतिक्रिया दी जाएगी।
यह मामला देशभर में काफी चर्चा में रहा। अब अदालत के इस फैसले के साथ मुकदमे के इस चरण का पटाक्षेप हो गया है। हालांकि, फैसले के विस्तृत आदेश का इंतजार है, जिससे अदालत के निर्णय के आधार और कानूनी पहलुओं की विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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