काशीपुर, 21 सितंबर2026। काशीपुर तहसील में राजस्व मामलों के निस्तारण की व्यवस्था पर सोमवार को उस समय सवाल खड़े हो गए, जब कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत ने तहसील का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वर्षों से लंबित स्वामित्व वाद, 143 के प्रकरणों और विभिन्न आवेदनों की प्राप्ति व्यवस्था में खामियां सामने आईं। एक मामले में आवेदन जमा होने से पहले ही रिपोर्ट लगाए जाने की बात सामने आने पर मंडलायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित कार्मिक से जवाब तलब करने के निर्देश दिए।

पांच साल से लंबित वादों पर सख्ती, आवेदन से पहले रिपोर्ट लगाए जाने पर मांगा स्पष्टीकरण
मंडलायुक्त ने तहसील कार्यालय के विभिन्न पटलों, अभिलेखागार और राजस्व अनुभागों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने जनता से जुड़ी सेवाओं के साथ-साथ 143 के मामलों तथा पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित स्वामित्व वादों की समीक्षा की। फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने पर उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आम जनता के कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पांच साल पुराने वादों पर कार्रवाई के निर्देश

उपजिलाधिकारी न्यायालय में पांच वर्ष से लंबित स्वामित्व वादों की समीक्षा के दौरान पांच मामलों में से दो में लापरवाही सामने आई। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। साथ ही पूर्व आदेशों का अनुपालन नहीं करने वाले लेखपाल और पेशकार को एक सप्ताह के भीतर प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश भी दिए गए।
मीडिया से बातचीत में मंडलायुक्त दीपक रावत ने बताया कि धारा 176, 210 और 229-बी समेत पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि कई मामले ऐसे मिले, जिनका समय रहते निस्तारण किया जा सकता था, लेकिन बार-बार आदेश जारी होने के बावजूद अंतिम आदेश नहीं किए गए।
कुर्रा तैयार करने में भी मिली लापरवाही
जमीन और पारिवारिक बंटवारे से जुड़े मामलों की समीक्षा में भी खामियां सामने आईं। मंडलायुक्त ने बताया कि कई मामलों में कुर्रा तैयार करने के आदेश काफी पहले हो चुके थे, लेकिन संबंधित लेखपाल द्वारा समय पर कुर्रा तैयार नहीं किया गया। इस पर भी जिलाधिकारी को संबंधित कार्मिक से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए गए हैं।
143 के मामलों की भी हुई समीक्षा

तहसील में भूमि के गैर-कृषि उपयोग से संबंधित धारा 143 के तहत प्राप्त आवेदनों की भी मंडलायुक्त ने समीक्षा की। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदनों के साथ संबंधित पंजिकाओं का अवलोकन किया। ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त होने वाले आवेदनों की जानकारी उन्होंने एसडीएम और तहसीलदार से ली।
निरीक्षण के दौरान विभिन्न आवेदनों पर प्राप्ति की तिथि दर्ज नहीं होने की बात भी सामने आई। मंडलायुक्त ने कहा कि आवेदन की प्राप्ति तिथि दर्ज नहीं होने से यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि कौन से मामले कितने समय से लंबित हैं। उन्होंने अधिकारियों को व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
आवेदन 18 को, रिपोर्ट 16 को!
निरीक्षण के दौरान एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मंडलायुक्त के अनुसार संबंधित आवेदन 18 तारीख को जमा हुआ, जबकि उस पर रिपोर्ट 16 तारीख को ही लगा दी गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने जिलाधिकारी को संबंधित कानूनगो से तत्काल जवाब तलब करने के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने कहा कि संबंधित कानूनगो और अन्य कार्मिकों से प्राप्त स्पष्टीकरण यदि संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कानूनगो कक्ष में भी मिली खामी
तहसील निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त कानूनगो कक्ष भी पहुंचे। यहां कानूनगो द्वारा प्राप्त किए जाने वाले आवेदनों की प्राप्ति पंजिका नहीं बनाए जाने पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने जिलाधिकारी को दोनों संबंधित कानूनगो का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।
इसके अलावा मंडलायुक्त ने तहसील परिसर में दस बड़े बकायेदारों की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश एसडीएम और तहसीलदार को दिए।
मंडलायुक्त दीपक रावत ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तहसील में आने वाले फरियादियों की समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, पारदर्शी और नियमानुसार किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी और लापरवाही को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जयकिशन, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र, एसडीएम अभय प्रताप सिंह, सीओ प्रशांत कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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