जसपुर/काशीपुर,23 मई 2026।
प्रदेश सरकार जहां भ्रष्टाचार पर सख्त है तो वहीं अधिकारी सरकारी योजनाओं को पालीता लगाते नजर आ रहे हैं ठेकेदार से मिली भगत कर सरकारी योजनाओं से लाखों के बारे न्यारे कर रहे हैं।जमीनी हकीकत सरकारी योजनाओं की पोल खोलती नजर आ रही है। जसपुर क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बसई में जलभराव की समस्या दूर करने के नाम पर स्वीकृत हुए ₹12 लाख 56 हजार के कार्य में भारी अनियमितताओं और बंदरबांट के आरोप सामने आए हैं।

शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में स्कूल परिसर में मिट्टी भरान एवं मरम्मत कार्य के लिए ₹12.56 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई थी। ग्रामीण निर्माण विभाग काशीपुर द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी कर एक ठेकेदार को कार्य सौंपा गया, लेकिन आरोप है कि उक्त ठेकेदार ने खुद काम कराने के बजाय यह पूरा कार्य किसी दूसरे ठेकेदार को मात्र ₹6 लाख में सौंप दिया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बाकी के ₹6 लाख 56 हजार कहां गए? क्या सरकारी धन को कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया?

जमीन पर अधूरा काम, कागजों में पूरा भुगतान ?
स्थानीय लोगों और स्कूल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि स्कूल परिसर में मिट्टी भरान का कार्य अधूरा और बेहद घटिया स्तर का किया गया है। भवनों की पिछली दीवारों के पास अब भी मिट्टी नहीं डाली गई है, जिससे बारिश के दौरान जलभराव की समस्या जस की तस बनी रहेगी।
लोगों का आरोप है कि करोड़ों के भ्रष्टाचार की तरह यहां भी “ऊपर से नीचे तक सेटिंग” के चलते सरकारी धन का खुला खेल खेला गया और अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे।

धामी सरकार के जीरो टॉलरेंस पर सवाल
प्रदेश के मुख्यमंत्री लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करते हैं, लेकिन बसई स्कूल का मामला सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आखिर बिना अधिकारियों की मिलीभगत के आधे दाम में काम कराकर लाखों का खेल कैसे हो गया?
यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह मामला सरकार की छवि पर भी बड़ा दाग साबित हो सकता है।

क्या बोले अधिकारी ?
जब इस संबंध में ग्रामीण निर्माण विभाग के सहायक अभियंता संजीव वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। वह मौके पर जांच के लिए पहुंचे हैं और निरीक्षण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि ठेकेदार द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को कम रकम में कार्य देकर नियम विरुद्ध तरीके से काम कराया गया है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जनता पूछ रही सवाल
- क्या ₹12.56 लाख का पूरा कार्य वास्तव में हुआ?
- यदि काम ₹6 लाख में हो गया तो बाकी रकम किसकी जेब में गई?
- क्या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का बंदरबांट हुआ?
- क्या सरकार इस मामले में विजिलेंस जांच कराएगी?
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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