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प्रयागराज। 9 जून 2026 पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में शांति भंग की धाराओं के कथित दुरुपयोग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है और किसी भी व्यक्ति को वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना जेल भेजना संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मंसूर अहमद उर्फ लल्लू की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने पाया कि मंसूर अहमद को खीरी क्षेत्र से उठाकर बिना उचित कानूनी प्रक्रिया पूरी किए सीधे जेल भेज दिया गया, जिसके कारण उन्हें आठ दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रहना पड़ा।

हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गैरकानूनी मानते हुए पीड़ित को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया कि यह राशि संबंधित तत्कालीन एसीपी के वेतन से वसूल की जाए।
पुलिस और मजिस्ट्रेटों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि प्रयागराज और गाजियाबाद समेत कई जिलों में शांति भंग की धाराओं का प्रयोग करते हुए बड़ी संख्या में लोगों को जेल भेजा गया। कोर्ट ने कहा कि कानून का उद्देश्य शांति व्यवस्था बनाए रखना है, न कि नागरिकों की स्वतंत्रता का अनावश्यक हनन करना।
अब बाहरी जमानती की बाध्यता खत्म
हाईकोर्ट ने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा कि शांति भंग के मामलों में रिहाई के लिए बाहरी जमानती की अनिवार्यता नहीं होगी। संबंधित व्यक्ति केवल 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत कर तत्काल रिहाई प्राप्त कर सकेगा।
अवैध हिरासत पर मिलेगा प्रतिदिन मुआवजा
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी नागरिक को 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है तो राज्य सरकार उसे 25 हजार रुपये प्रतिदिन की दर से मुआवजा देगी। बाद में यह राशि दोषी अधिकारी के वेतन से वसूल की जाएगी तथा उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
रिकॉर्ड जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि एहतियाती कार्रवाई के तहत वर्ष 2024 में 283, वर्ष 2025 में 1,321 और वर्ष 2026 में अब तक 721 लोगों को हिरासत में लिया गया। इस प्रकार कुल 2,325 लोगों को शांति भंग की धाराओं के तहत बंद किया गया।
खंडपीठ ने कहा कि इनमें से कई लोगों को एक सप्ताह से लेकर 20 दिनों तक हिरासत में रखा गया, जो गंभीर चिंता का विषय है।
अदालत ने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को निर्देश दिया है कि आदेश के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट 14 सितंबर 2026 तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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