काशीपुर। 10 मई 2026 राष्ट्रीय नवजात शिशु विज्ञान मंच (एनएनएफ) भारत के “प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान-2026” के अंतर्गत रविवार को पूरे देश में “राष्ट्रीय नवजात पुनर्जीवन दिवस” बड़े स्तर पर मनाया गया। “एक दिन, एक राष्ट्र, एक मिशन” थीम पर आधारित इस अभियान के तहत देशभर में एक ही दिन में 24 हजार 500 से अधिक प्रतिभागियों को नवजात शिशु पुनर्जीवन कार्यक्रम (एनआरपी) का प्रशिक्षण दिया गया। इसे नवजात शिशुओं की सुरक्षा एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

इस राष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व एनएनएफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. ललन के. भारती एवं सचिव डॉ. अमित उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) तथा फॉग्सी के सहयोग से किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशुओं के पुनर्जीवन की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर नवजात मृत्यु दर को कम करना है।

उत्तराखंड में इस अभियान का संचालन आईएपी उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता के नेतृत्व में किया गया। राज्यभर में 17 विभिन्न केंद्रों पर आयोजित कार्यक्रमों में 250 से अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इनमें चिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे।
काशीपुर स्थित साहोता हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रम में एनएनएफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंडल प्रमुख डॉ. एस. निम्बालकर सहित कई वरिष्ठ विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान नवजात शिशुओं के पुनर्जीवन से संबंधित वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
डॉ. रवि सहोता ने कहा कि जन्म के शुरुआती क्षणों में सही समय पर किया गया नवजात पुनर्जीवन हजारों शिशुओं का जीवन बचा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इतने बड़े स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
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