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जसपुर | 23 दिसंबर 2025 उत्तराखंड वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता शादाब शम्स मंगलवार को जसपुर क्षेत्र के बैलजूड़ी में स्थित भाजपा नेता डॉ. यूनुस चौधरी के निवास स्थान पर पहुंचे। उनके आगमन पर ग्रामीणों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा फूल-मालाएं पहनाकर जोरदार स्वागत किया गया। स्वागत कार्यक्रम के बाद शादाब शम्स ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम 2025 और वक़्फ़ संपत्तियों के पंजीकरण को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिए।

उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा वर्ष 2025 में वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता के उद्देश्य से वक़्फ़ अमेंडमेंट एक्ट लागू किया गया है, जिसके तहत उम्मीद पोर्टल पर वक़्फ़ की जमीनों और संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में कुछ लोगों ने इस कानून का विरोध किया और मुस्लिम समाज को गुमराह किया गया, जिसके कारण करीब साढ़े चार महीने तक असमंजस की स्थिति बनी रही।

शादाब शम्स ने कहा, “देर आए दुरुस्त आए। अब मुस्लिम समाज को यह समझ में आ गया है कि वक़्फ़ बोर्ड में संपत्तियों का पंजीकरण बेहद ज़रूरी है। जिन लोगों ने पहले विरोध किया, वही अब रजिस्ट्रेशन कराने में जुटे हैं, लेकिन समय कम होने के कारण सभी पंजीकरण नहीं हो पाए।”

उन्होंने बताया कि मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया, जहां से निर्देश मिले कि सभी राज्य अपने-अपने टर्मिनल के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करें। वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष ने जानकारी दी कि गढ़वाल टर्मिनल के लिए 6 फरवरी 2026 तक और कुमाऊं टर्मिनल के लिए 15 मार्च 2026 तक वक़्फ़ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा तय की गई है। फिलहाल पोर्टल दोबारा खोल दिया गया है।

उन्होंने उत्तराखंड की मुस्लिम आवाम से अपील की कि वे अपनी सभी वक़्फ़ संपत्तियों को समय रहते उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराएं। साथ ही चेतावनी दी कि जो व्यक्ति जानबूझकर वक़्फ़ की संपत्ति को दर्ज नहीं कराएगा, उसे वक़्फ़ माफिया की श्रेणी में रखकर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शादाब शम्स ने कहा कि वक़्फ़ की संपत्तियां ज़कात, सदका और खैरात के पैसों से बनी होती हैं, जो गरीबों, यतीमों, विधवाओं और बेसहारा लोगों का हक़ है। इस हक़ को हड़पने वालों को दुनिया और आखिरत—दोनों जगह जवाब देना होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में वक़्फ़ बोर्ड को लूट का अड्डा बना दिया गया था। न तो अच्छे अस्पताल बने, न शिक्षा के लिए ठोस कदम उठाए गए और न ही बेटियों के लिए विश्वविद्यालय या अनाथालय स्थापित किए गए। उन्होंने कुछ प्रभावशाली लोगों पर वक़्फ़ संपत्तियों पर कब्जे और अवैध निर्माण के आरोप भी लगाए।
वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि धामी सरकार वक़्फ़ संपत्तियों के मामले में किसी भी दोषी को बख्शने वाली नहीं है। यदि मुस्लिम समाज वक़्फ़ बोर्ड के साथ खड़ा होता है तो आने वाला समय मुसलमानों के लिए उज्ज्वल होगा और बच्चों का भविष्य सुरक्षित बनेगा।
इस अवसर पर
डॉ. हसन नूरी (सदस्य, वक़्फ़ बोर्ड उत्तराखंड),
डॉ. यूनुस चौधरी (भाजपा नेता),
नफ़ीस अहमद (सदस्य, अल्पसंख्यक आयोग),
अली जान, गुलफाम शेख, फ़राज़ ख़ान, अज़हर प्रधान, शाहिद हुसैन,
हाजी फ़रासत हुसैन, इकराम प्रधान बेलजोड़ी एवं फारूक चौधरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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