काशीपुर।15 जून 2026 कभी कुओं, तालाबों और जल स्रोतों के लिए प्रसिद्ध रहा काशीपुर आज जल संकट और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। नगर के वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व छात्र नेता वेद प्रकाश विद्यार्थी ने शहर के प्राचीन कुओं और तालाबों को पुनर्जीवित करने की मांग उठाते हुए नगर प्रशासन और महापौर से इस दिशा में ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया है। प्रेस को जारी अपने बयानों में वेद प्रकाश विद्यार्थी का कहना है कि काशीपुर में एक समय अनेक पुख्ता कुएं, तालाब और जलधाराएं हुआ करती थीं, जो न केवल पेयजल का स्रोत थीं बल्कि नगर की सांस्कृतिक पहचान भी थीं। उन्होंने स्मरण करते हुए बताया कि वर्तमान में लक्की कॉर्नर के पास जो नाला दिखाई देता है, वह कभी कौसी नदी से आने वाली नहर का हिस्सा था। यह जलधारा रामनगर रोड से होती हुई कटोराताल पुलिस चौकी के निकट एक बड़े जलाशय में गिरती थी, जिसे स्थानीय लोग “धध्धा” के नाम से जानते थे। यहां नगरवासी स्नान करने आते थे और घाटों पर कपड़े धोते देखे जा सकते थे। आज वही स्थान कूड़े और गंदगी से भरा पड़ा है।

उन्होंने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष स्वर्गीय डॉ. रामसरन सारस्वत को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इस जलधारा की विशेष सफाई कराई थी और स्वयं गमबूट पहनकर सफाई कार्य का निरीक्षण करने उतरे थे।
विद्यार्थी ने बताया कि महाराणा प्रताप चौक पर स्थित एक प्राचीन कुआं, डॉक्टर लेन में भाजपा कार्यालय के समीप मौजूद कुआं तथा नगर के कई अन्य जल स्रोत समय के साथ बंद कर दिए गए या उन पर अतिक्रमण हो गया। उनका मानना है कि यदि इन ऐतिहासिक कुओं और तालाबों को पुनः खोला और संरक्षित किया जाए तो भविष्य में जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने नगर की महापौर से आग्रह किया है कि नगर के सभी प्राचीन जल स्रोतों का सर्वेक्षण कराकर उन्हें पुनर्जीवित किया जाए और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए।
यहां सवाल उठने लाजिम है
वेद प्रकाश विद्यार्थी द्वारा उठाया गया मुद्दा केवल काशीपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के अनेक नगरों एवं गांवों की वास्तविकता को सामने लाता है। यह किसी से छिपा नहीं है कि बुजुर्गों की धरोहर माने जाने वाले तालाब, पोखर और पुख्ता कुएं तेजी से लुप्त होते जा रहे हैं। शहर ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन जल स्रोतों पर अतिक्रमण कर भवन, दुकानें और बाजार खड़े कर दिए गए हैं।
काशीपुर नगर के जसपुर खुर्द स्थित कोर्ट रोड मोड़ इसका एक उदाहरण है, जहां आज एक व्यावसायिक मार्केट खड़ी है। स्थानीय लोगों के अनुसार इसी स्थान पर कभी एक पुख्ता कुआं हुआ करता था। विडंबना यह है कि प्रशासन की जानकारी के बावजूद कुछ वर्ष पूर्व वहां दुकानों का निर्माण हो गया और जल स्रोत इतिहास बनकर रह गया।
आज जब भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहराता जा रहा है, तब पुराने तालाबों और कुओं को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। प्रश्न यह है कि क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर विषय पर ध्यान देंगे? क्या अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके जल स्रोतों को उनकी पहचान वापस मिलेगी? यह आने वाला समय ही बताएगा।
फिलहाल, वेद प्रकाश विद्यार्थी द्वारा उठाई गई यह मांग निश्चित रूप से जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा ऐसा मुद्दा है जिस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। काशीपुर की ऐतिहासिक जल विरासत को बचाने के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों को मिलकर आगे आना होगा।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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