रमज़ान की रहमतों, बरकतों और इबादतों से सजी मुकद्दस महीने की विदाई के साथ अब हर दिल को जिस लम्हे का इंतज़ार था, वो खुशी का त्योहार ईद-उल-फितर दस्तक दे चुका है। यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि मोहब्बत, भाईचारे, इंसानियत और शुक्राने का पैगाम लेकर आने वाली एक पाक घड़ी है, जो हर चेहरे पर मुस्कान और हर दिल में सुकून भर देती है।

एक महीने तक रोज़ा रखकर, अल्लाह की इबादत में खुद को समर्पित करने के बाद ईद का दिन मुसलमानों के लिए खास इनाम की तरह होता है। सुबह-सुबह ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज़ अदा की जाती है, जहां अमन, चैन और तरक्की के लिए दुआएं मांगी जाती हैं।
ईद-उल-फितर हमें सिखाती है कि हम अपने आसपास के गरीब और जरूरतमंद लोगों का भी ख्याल रखें, उन्हें जकात और फितरा देकर उनकी खुशियों में शामिल हों। यही इस त्योहार की असली रूह है—सबको साथ लेकर चलना और खुशियां बांटना।

रमजान का महीना रहमतों और बरकतों का महीना माना जाता है, जिसमें हर मुस्लिम बंदा इबादत में मशगूल रहता है। इस दौरान रोजे रखकर, जरूरतमंदों को जकात और फित्रा देकर समाज में बराबरी और मदद का संदेश दिया जाता है।

इस वर्ष भारत में पहला रोजा 19 फरवरी को रखा गया था, जबकि सऊदी अरब में 18 फरवरी से रोजों की शुरुआत हुई थी। इसी क्रम में सऊदी अरब में 20 मार्च को ईद-उल-फितर मनाई गई, जबकि भारत में आज 21 मार्च को ईद का त्योहार मनाया गया।

काशीपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत इस्लामनगर बसई स्थित आमना मस्जिद में सुबह 9:00 बजे ईद-उल-फितर की नमाज अदा की गई। नमाज के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे। नमाज के बाद सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी।
इस मौके पर नमाजियों ने देश में अमन-चैन, तरक्की और आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए अल्लाह से खास दुआएं मांगीं।
ईद के इस पावन अवसर पर क्षेत्र में खुशी और भाईचारे का माहौल देखने को मिला, जहां लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर मुबारकबाद दी और त्योहार की खुशियां साझा कीं।









सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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