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काशीपुर। 24 अप्रैल 2026 जनसेवा, विकास और सहज व्यक्तित्व की पहचान रहे पूर्व सांसद स्व. सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया की 16वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को शहर भावनाओं और श्रद्धा से सराबोर नजर आया। बाजपुर रोड स्थित सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया मैनेजमेंट एंड लॉ कॉलेज में विधायक निधि से निर्मित पं. नारायण दत्त तिवारी स्मृति पुस्तकालय कक्ष का उद्घाटन किया गया। यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि शिक्षा और समाज सेवा को समर्पित एक प्रेरणादायक पहल बन गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्मृति यज्ञ के साथ हुआ, जिसमें समर्थकों, शिक्षाविदों और स्थानीय नागरिकों ने स्व. गुड़िया को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष एवं बाजपुर विधायक यशपाल आर्य ने पुस्तकालय कक्ष का फीता काटकर उद्घाटन किया।

इस अवसर पर यशपाल आर्य ने कहा कि स्व. सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया केवल एक सांसद नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़े विकास पुरुष थे। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में क्षेत्र में विकास की नई पहचान बनी और जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर होता था। उन्होंने भावुक होकर कहा कि स्व. गुड़िया उनके बड़े भाई जैसे थे और उनकी कमी हमेशा महसूस होती रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान स्व. गुड़िया की पुत्री दीपिका गुड़िया आत्रेय ने भावुक शब्दों में कहा कि उनके पिता ने हमेशा समाज और शिक्षा को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि पिता की स्मृतियों को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रखना उनके व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं होता, इसलिए हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर समाजहित से जुड़ा कोई कार्य करने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह पुस्तकालय कक्ष विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का केंद्र बनेगा और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।
दीपिका ने कहा कि “पिता की सबसे बड़ी सीख यही थी कि समाज से जो मिला है, उसे समाज को लौटाना चाहिए। यह पुस्तकालय उसी सोच का विस्तार है।”

वहीं कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अनुपम शर्मा ने कहा कि स्व. सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया का राजनीतिक जीवन जनसेवा की मिसाल था। उन्होंने कहा कि आज राजनीति में ऐसे व्यक्तित्व कम देखने को मिलते हैं, जिन्होंने पद को शक्ति नहीं बल्कि जिम्मेदारी माना।
उन्होंने कहा कि स्व. गुड़िया ने जनता के बीच विश्वास कायम किया और विकास को राजनीति का मूल उद्देश्य बनाया।
अनुपम शर्मा ने कहा कि उनकी स्मृति में शिक्षा से जुड़ा यह कार्य समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला कदम है और यह नई पीढ़ी को संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देगा।

पुस्तकालय कक्ष का निर्माण केवल एक भवन नहीं, बल्कि विचारों और मूल्यों की विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम माना जा रहा है। ऐसे समय में जब स्मृतियां अक्सर औपचारिकताओं तक सीमित हो जाती हैं, स्व. सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया की पुण्यतिथि पर हुआ यह आयोजन यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो समाज को नई दिशा दे।
स्व. गुड़िया भले आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनके नाम से जुड़ी यह पहल आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की प्रेरणा देती रहेगी।
सम्पादक काशी क्रांति हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र
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