काशीपुर। महानगर कांग्रेस कमेटी की जिला अध्यक्ष अलका पाल ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को “लोकतंत्र की दिशा बदलने की साजिश” बताया है। उनके बयान ने स्थानीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
अलका पाल ने स्पष्ट कहा कि संविधान संशोधन विधेयक 131 को महिला आरक्षण से जोड़कर पेश करना “जनता को भ्रमित करने की कोशिश” है। उनके मुताबिक, यह कदम दरअसल दक्षिण, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों की राजनीतिक भागीदारी को सीमित कर देश के चुनावी समीकरण को बदलने की रणनीति का हिस्सा है। “यह महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन को अपने पक्ष में झुकाने का प्रयास है,” उन्होंने तीखे शब्दों में कहा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि असली सवाल यह है कि जब महिला आरक्षण अधिनियम 2023 पहले ही पारित हो चुका है, तो उसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है। “सरकार महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रही है, लेकिन हकीकत में उन्हें उनका हक देने से बच रही है,” उन्होंने आरोप लगाया।
अलका पाल ने इस मुद्दे को सिर्फ महिला अधिकारों तक सीमित न मानते हुए इसे संविधान और संघीय ढांचे से भी जोड़ा। उनका कहना है कि परिसीमन का इस्तेमाल एक राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है, जिससे सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है।
ओबीसी महिलाओं के आरक्षण पर उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि अब तक इस वर्ग के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है। “अगर सरकार सच में समावेशी महिला सशक्तिकरण चाहती है, तो उसे हर वर्ग की महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने होंगे,” उन्होंने कहा।
अपने बयान के अंत में अलका पाल ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि केंद्र सरकार को अब स्पष्ट जवाब देना होगा—या तो महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को बिना शर्त लागू करे, या फिर यह स्वीकार करे कि महिलाओं के नाम पर राजनीतिक एजेंडा चलाया जा रहा है। “देश की महिलाएं अब प्रतीक नहीं, अपना अधिकार चाहती हैं—और उसे लेकर रहेंगी,” उन्होंने चेतावनी दी।
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